मेदिनीनगर: जिले के स्कूली बस संचालक अपनी मोटी कमाई के लिए किस कदर नौनिहालों की जान को दांव पर लगाते है इसका खुलासा मंगलवार की सुबह जिला परिवहन पदाधिकारी के जांच में हुआ। इस दौरान कुल 34 स्कूली बसों की जांच की गई तो खुद डीटीओ पंकज कुमार साव भी भौच्चके रह गए। दरअसल किसी भी बस चालक के पास वैध ड्राइविंग लाईसेंस नहीं पाया गया। किसी के पास ट्रक चलाने का तो कोई हल्के वाहन का लाईसेंस लेकर स्कूल बस चला रहा था। यही नहीं, दर्जनों चालक के लाइसेंस बस तीस वर्ष से अधिक पुराने पाए गए। जांच में किसी भी बस में आवश्यक मेडिकल किट व फायर सिस्टम दुरूस्त नहीं मिला। डीटीओ ने बताया कि यह सीधे तौर पर बच्चों के जान के साथ खिलवाड़ का मामला बनता है। मानवता के नाते भी इसे सहन नहीं किया जा सकता है। पूर्व से ही सूचना मिल रही थी कि अधिकतर बस संचालक स्कूली बच्चों को जानवरों की तरह लाद कर स्कूल ले जाते है। इसी आलोक में मंगलवार की सुबह पांकी रोड में औचक निरीक्षण किया गया। इसमें कई बसों में तो 92 बच्चे तक पाए गए। कोई चालक वाहन का कागजात नहीं दिखा सका। कहा गया कि कागजात स्कूल में है। सभी बस संचालकों को दो दिनों के अंदर विहित प्रपत्र में स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। इसमें वाहन संख्या, चालक का नाम, लाईसेंस का प्रकार, वैधता, परमिट की वैधता के साथ प्रदूषण, बीमा, फिटनेस व टैक्स के कागजात को जमा करेंगे।ब्रेक लगाने पर नीचे जा सकते है बच्चे
मंगलवार की सुबह स्कूली बसों की जांच में बच्चों को बोनट पर बैठाने पर डीटीओ ने नाराजगी व्यक्त की। बताया कि किसी भी आपात परिस्थिति में ब्रेक लगाने पर बच्चों को सामने कांच से चोट लगना तय है। यही नही, बच्चे बस से नीचे भी जा सकते है। सभी बसों में क्षमता से अधिक बच्चे पाए गए। यहीं नहीं शिक्षक या शिक्षिकाएं मजे से बैठी रही और बच्चे बस में खड़े पाए गए।
डीटीओ ने बताया कि आठ जुलाई को सदर एसडीओ ने सभी स्कूल बस संचालकों के साथ बैठक आहुत की है। इसमें संचालकों का प्रावधानों का शतप्रतिशत पालन करने को कहा जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई बस संचालक नियमों का उल्लघंन करते पाए जाता है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग के कार्रवाई को नामधारी ने सराहा

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