रांची, दिलीप कुमार। अगस्त माह में शराब की खेप के साथ फर्जी तरीके से युवकों को फंसाने का मामला हो या तोपचांची के इंस्पेक्टर उमेश कच्छप की जून 2016 में खुदकशी का, जब जांच पुलिस अधिकारियों के खिलाफ होती है तो उसकी गति और तपिश दोनों कम हो जाती है।

Go to Source

Leave a Reply