रस्मे राहे दह्र क्या, जोश ए मोहब्बत भी तो हो, टूट जाती है हर जंजीर, वहशत भी तो हो… शायर फिराक गोरखपुरी की पंक्तियां लोहरदगा के एक प्रेमी जोड़े पर जीवंत हुई. जमाने के तमाम विरोध के बावजूद दोनों एक हुए.
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