मृत शरीर या शव के करीब जाने से पहले वयस्क व्यक्ति भी एक बार सोचता जरुर है. बच्चों के सामने तो मौत, शव कब्रिस्तान जैसे शब्दों की चर्चा से भी हम बचते हैं. पर लोहरदगा की तस्वीर ही कुछ और है. यहां बच्चे इन्हीं के साथ खेलते, खाते और पढ़ते हैं. वह भी एक शव नहीं, सैकड़ों शवों के बीच.
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