स्कूल में छत नहीं, कमरे में खिड़कियां नहीं और बच्चों के लिए नहीं बनता है मिड डे मील. स्कूल के बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे. ये हालात है जिले के नावाबजार प्रखंड का कन्या प्राथमिक विद्यालय रजहारा का. 1956 में स्थापित इस विद्यालय में तीन सरकारी शिक्षक हैं, एक पारा, बच्चों की संख्या भी 75 के करीब है, मगर व्यवस्था शून्य.
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